कविता : एक नंबर बेकार...
मस्त जवानी में तो
आग ही लगेगी
बगैर उपाय के वो
थोड़ी न बुझेगी ?
जो इस बात को समझ गए
वो बड़े होशियार हैं
जो इसे ना समझे वो तो
एक नंबर बेकार हैं
जो इसे ना समझे वो तो
एक नंबर बेकार हैं .......
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