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गुप्त प्रेमिका का जनाज़ा

                
                                                         
                            गुप्त प्रेमिका का जनाज़ा
                                                                 
                            
एक गुप्त प्रेमिका का जब, जनाज़ा निकला।
जनाज़े में उसका वो सारा मोहल्ला निकला।
पर
वो, जनाजा गुजरने के बाद घर से निकला।
पर देख जनाजे को दर्दे दिल उसकी
आँखों से आँसुओ का वो, दरियाँ निकला।
दिल दहल उठा तो उसे
दफनाने के बाद उसकी कब्र पे वो निकला।
जैसे ही कब्र के पास वो पहुँचा तो कब्र से
आवाज आई। हे! मेरे
यार मुझे दफनाने के बाद तू कैसे निकला।
उसने कहा, अपना प्यार तो एक राज़ था।
दुनिया को पता न चले इसलिए
तुझे अन्तिम विदाई देने को मै अब निकला।
 
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एक घंटा पहले

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