आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

शिकवा ए खुदा

                
                                                         
                            गर मुलाकात हुई खुदा से तो शिकायत जरूर करेंगे
                                                                 
                            
समझे तो सही खुदा को,फिर इबादत जरूर करेंगे

के किसी के हाथ लगा है अमृत
किसी के नसीब में भी नहीं शर्बत

कोई मोहताज़ हुआ है दाने को
एक निवाला भी नहीं खाने को

कहीं सड़ता भंडारण दुकानों में
जन्नत का नज़ारा मकानों में

किसी को नसीब नहीं समशान भी
कोई नाप गया आसमान भी

कोई कहता है अब यहां न्याय नहीं
सुना है भगवान के घर अन्याय नहीं

जिसके पास कायनात है सारी
उसी के घर बरसात है भारी

करनी है इबादत तो दाम की करो
छोड़ो चर्चा,बात कुछ काम की करो

नीटू मावी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर