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दिल की तड़प

                
                                                         
                            के बिछड़ा हुआ मेरा यार मिल जाए
                                                                 
                            
तड़पते दिल को करार मिल जाए

ये तपती दुपहरी जेठ का महीना
पहली ही बारिश में बहार मिल जाए

मिल गया तू अगर तो संसार मिल जाए
उम्र सारी ना मिले पर घड़ी दो चार मिल जाए

वो भी बैठे हों काश हमसे मिलने की आस में
बस ऐसा ही कोई एक समाचार मिल जाए

वर्षों बाद बस एक एतबार मिल जाए
भरोसा हो पक्का कभी बेकार मिल जाए

फिर तुम्हारे बाद ये दिल कहीं लगता ही नहीं
हर रोज चाहे दोस्त हजार मिल जाए

बस एक बार जीवन का सार मिल जाए
एक दूजे को जोड़ दे कोई तार मिल जाए

मैं यूं ही अचानक कहीं राहों से गुजरूं
कहीं होती मेरे यार की तकरार मिल जाए
-नीटू मावी
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7 घंटे पहले

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