देखो वो जो अपनी जिद पर अड़ा है।
सुपर पावर नही, बस एक हिजड़ा है।
धर्म,जाती,भाषा,याभाई-भतीजावाद,
लगता है बशरियत से ज्यादा बड़ा है।
खुराफाती शीर्षासन बता रहे है उसे,
एक आदमी जो सिर के बल खड़ा है।
तुम्हारे नारों मे रोटी देख ली गरीब ने,
तुम्हें जीताने ,गुरबत का वोट पड़ा है।
एक बकरा, एक बोतल और गणिका,
कार्यालय जलेबी,अफसर फाफड़ा है।
संविधान मिला सूट बुट मे और बोला,
मेरा तो अंतर्वस्त्र ही चिथड़ा-चिथड़ा है।
- जयंत दिक्षित
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