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देश भक्ति गीत

                
                                                         
                            वीर प्रसूता मिट्टी अपने,प्यारे हिंदुस्तान की
                                                                 
                            
सदियों के पन्ने -पन्ने पर ,कथा अमर बलिदान की।
वंदेमातरम् वंदेमातरम्....

वीरों ने निज जीवन गाथा,लिख दी काल-कपाल पर
कीर्ति शेष हो अंकित करते,नाम व्योम के भाल पर
लिखें हवा के ऑंचल पर नित-नूतन गीत प्रयाण का
संकल्पित मन लक्ष्य मात्र है, मातृभूमि कल्याण का

विश्व-वंद्य यह जननी प्यारी,चाह हमेशा आन की
सदियों के पन्ने-पन्ने पर,कथा अमर बलिदान की।
वंदेमातरम् वंदेमातरम्....

मेरु तुंग सम उन्नत मस्तक,सागर हृदय विशाल है
शौर्य शोण का देख-देख कर चकित हुआ दिग्पाल है
आज़ादी के हवन-कुंड में, समिधा अर्पित प्राण की
जिसकी मुट्ठी में अरि तड़पें,करें कल्पना त्राण की

सलिला करती रहती देखो,सदा बात सम्मान की
सदियों के पन्ने-पन्ने पर, कथा अमर बलिदान की।
वंदेमातरम् वंदेमातरम्...

हर-हर घर-घर देख तिरंगा, कंपित
शत्रु प्रकांड है
आज़ादी का अमर-महोत्सव,मना रहा ब्रह्मांड है
युग-युग के कंठों पर स्तुति,विस्मित होता काल है
संकल्पित मन में अभिलाषा, नतमस्तक महाकाल है
रज-कण चंदन लगता अपना, नहीं भूख पहचान की
सदियों के पन्ने -पन्ने पर, कथा अमर बलिदान की।
वंदेमातरम् वंदेमातरम्....

वीर-प्रसूता मिट्टी अपने प्यारे हिंदुस्तान की
सदियों के पन्ने-पन्ने पर, कथा अमर बलिदान की।।
वंदेमातरम् वंदेमातरम्
-नीलम सिंह
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56 मिनट पहले

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