वक़्त कभी कहीं किसी का मुंतज़िर नहीं रहता है
वक़्त का मुंतज़िर मग़र हर कोई हर कहीं रहता है
वक़्त से आगे चलना अच्छा न पीछे रहना अच्छा
वक़्त के साथ चलनेवाला ही हमेशा सही रहता है
-एन. आर. कस्वाँ
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