कोई सोच नहीं कोई इल्म नहीं कोई हुनर नहीं कोई नज़रिया नहीं,
तालीम से बढ़ कर मु'आसरे में बदलाव का और कोई ज़रिया नहीं!
-एन. आर. कस्वाँ
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X