हयात सबकी एक जैसी है तो सबको मुफ़ीद होनी चाहिए
रात सब की एकसी है तो मयस्सर सबको नींद होनी चाहिए
क्यूँ कोई नाउम्मीद रह कर उम्र - ए - तमाम चला जाता है
एक जैसी ज़िन्दगी में सब के एक जैसी उम्मीद होनी चाहिए
बे-शक दीन धर्म जात मज़हब रखते रहें लोग जुदा - जुदा
खुदा सबका एक होलीदिवाली और सबकी ईद होनी चाहिए
© डॉ. एन. आर. कस्वाँ 'बशर' bashar بشر
गुलिस्तान-ए-अदब gulistaan-e-adab گلستانِ ادب
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