मुसबत ख़्याल को कोई ज़हर मार नहीं सकता
और मनफ़ी ख़्याल को कोई उबार नहीं सकता!
हस्सास और अहसास ही जिसके मिट गए हों
कोई नसीहत- आमोज़ उसे सुधार नहीं सकता!
-न. आर. कस्वाँ
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