कांटों में गुल कीचड़ में कमल खिलते हैं
पत्थरों में भी रत्न मणि और हीरे मिलते हैं
माना कि हज़ारों कमियाँ हैं इन्सां में मग़र
किरदार में उसके गुणों के जखीरे मिलते हैं
-एन आर कस्वाँ
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