वोह सिर्फ़ नाम के थे अपने लगते गये किनारे
हुए अहबाब दूर सारे आए रक़ीब क़रीब हमारे
काबिलियत हयात में सिर्फ़ खुदकी काम आई
कोशिशों से हारे ना किसी की साजिशों से हारे
-एन आर कस्वाँ
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