ज़रूरी नहीं है के नज़र हर रहगुज़र का छोर आएगा
चलते रहिए राहे सफ़र कुछ न कुछ तो और आएगा!
इस ठौरसे उसठौर नए मोड़ और नए मरहले आएंगे
इस दौर से निकलेंगे तोही तो कोई और दौर आएगा!
-एन आर कस्वाँ
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