अंदाज़े- बयाँ कुछ और हो आपकी बात का,
भूले ना लम्हा कोई आप से हुई मुलाक़ात का!
गुज़र गई सो गुज़र गई अब तक जैसे गुज़री,
हर-पल हो मग़र ख़ूबसूरत बची हुई हयात का!
-एन. आर. कस्वाँ
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X