कविता - होली मनाना तो एक बहाना है
दुःख को अपने रंगों में मिलाकर,
खुशियों के रंगों से रंगोली सजाकर।
समय की गर्त दुःखों पर जमाकर,
गमों को अपने भूल जाना है।।
नया नहीं है यह दस्तूर पुराना है,
गमों को छिपाकर दिल में अपने।
खुद को रंगों में फिर छिपाना है ,
होली मनाना तो एक बहाना है ।।
पल पल याद आयेंगे बिछड़े अपने,
अब तो सपनों में मिलकर सुख पाना है।
समय की गर्त दुःखों पर जमाकर,
गमों को अपने भूल जाना है।।
आते हैं शुभ चिंतक देने दिलाशा,
चाहे सब गमों को भूल जाना है।
आज समझ मेरे आया अब,
होली मनाना तो एक बहाना है।।
गले से गले जब मिल जाते हैं,
गमों का फिर बंट जाना है।
सुख दुःख होते हैं धूप छांव से,
एक का आना दूजे का जाना है।।
गम बांटों घटेंगे गम , गमों को भूल जाना है,
नया नहीं है यह दस्तूर पुराना है।
गमों को छिपाकर दिल में अपने,
खुद को रंगों में फिर छिपाना है ।।
आंखों को समझाया हमने बहुत,
उसको तो आंसू छलकाना है।
मत रोको आंसू दुःख के, अच्छा है बाहर आना है,
कहावत सुनी है बहुत पुरानी मन हल्का हो जाना है।।
- नन्ना कवि
राहुल भारद्वाज
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