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स्वतंत्रता अक्षुण्ण हो

                
                                                         
                            कितने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से
                                                                 
                            
कई वर्षों के गुलामी के बाद इन जंजीरों को तोड़ा
असंख्य बलिदानों और संघर्ष के बाद मिली है आजादी
हमारा सिर्फ ध्यान रखना है कि कोई नहीं आये रोड़ा
हमारी कोशिश सिर्फ कोशीश करनी है
हमारी स्वतंत्रता अक्षुण्ण हो
कोई दुश्मन न तोड़ सके हमारी रक्षा कवच को
कोई दुश्मन न घुस पाये इस वतन की सरजमीं पर
हमारी भारत माता पहले कई बार हमारी लहू रंग चुकी है
अब हमें भारत- भूमि को दुश्मनों के लहू से रंगना है
हमारे देश की भूमि बच्चों के खेल का अंगना है
हमारी एकता, संगठतता, देश के प्रति संकल्प अक्षुण्ण हो
हमारी स्वतंत्रता अक्षुण्ण हो, हमारी स्वतंत्रता अक्षुण्ण हो
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एक घंटा पहले

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