सबको पता है
मरना है एक दिन
आज नहीं तो कल
जब तक जी लो
शांति के दो पल।
समय बीत रहा है
उम्र बीत रहा है
प्रकृति का नियम अटल
थोड़ा ठहरो, बीता लो
शांति के दो पल।
परेशान है, हैरान है
चेहरे पे उदासी है
मन में उलझन प्रबल
थोड़ा सोचो, जी लो
शांति के दो पल।
जिंदगी की आपा- धापी में
भूले अपने आप को
मलाल न रहे कल
क्या सोचते हो,जी लो
शांति के दो पल।
प्यार हुआ है
तलाक हुआ है
जिंदगी हुआ कौतूहल
यही समय है, जी लो
शांति के दो पल।
बच्चे का कैरियर है
और धन कमाना है
तभी कहलायेगे सफल
अरे नहीं, जी लो
शांति के दो पल।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X