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संस्कार, क़िस्मत, धरोहर और अनुशासन

                
                                                         
                            हँसी, खुशी, नींद और प्यास
                                                                 
                            
बाजार में नहीं मिलता।
सत्य, सम्मान, संस्कृति और विरासत
बाजार में नहीं मिलता।
संतोष, प्यार, त्याग और मर्यादा
बाजार में नहीं मिलता।
चेतना, भूख, जज्बात और सहनशीलता
बाजार में नहीं मिलता।
मुस्कुराहट, शांति, सहानभूति और आशीवाद
बाजार में नहीं मिलता।
आशा, धैर्य, बुद्धि और मनोबल
बाजार में नहीं मिलता।
संस्कार, क़िस्मत, धरोहर और अनुशासन
बाजार में नहीं मिलता।
-नागमणि कुमार सिंह
 
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