महज एक तारीख नहीं हैं,
हमारी संस्कृति की पहचान हैं।
जन जन की आवाज है,
भारत मां की शान हैं।
खेत खलिहानों की भाषा हैं,
बाजारों की आशा हैं।
भारतीय संविधान की परिभाषा हैं,
हिन्दी भाषा का प्रचार का नशा हैं।
युगों- युगों की विरासत हैं,
अनेकों आत्माओं की इबादत हैं।
भारतीयों गीतों की नफासत है,
विकसित भारत की इमारत हैं।
विदेशों में हमारा स्वाभिमान हैं,
सरकारी कार्यलय का सम्मान हैं।
राजभाषा से राष्ट्रभाषा बनाने का,
करोड़ो भारतीयों का अरमान है।
भारतीय समाज का सरस हैं,
सीमाओं से परे इसकी गूंज हैं।
हमारी धरोहर की पुंज है,
महज एक दिवस नहीं हैं।
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