आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

इच्छा

                
                                                         
                            तृष्णा
                                                                 
                            

बंजारे से सबने पूछा,
नाम है क्या और धाम कहां,
मृगतृष्णा भी देखीं सबने ,
फिर भी पूछा बाम कहां,
मूढ़ों के जंगल में जाकर,
ढूढा फिर भी अज्ञ कहां,
बंजारे से सबने पूछा,
नाम है क्या और धाम कहां,
खडगहस्त भी देखा सबने,
फिर भी पूछा शौर्य कहां,
काष्ठ पिंजर के टुकड़े भी,
सम्बोधित हो भुजंग जहां
उसी क्षितीश से पूछा जगने,
श्यामा की तृष्णा हैं कैसी
बंजारे से सबने पूछा,
नाम है क्या और धाम कहां।

नाग मणी



हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
7 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर