तृष्णा
बंजारे से सबने पूछा,
नाम है क्या और धाम कहां,
मृगतृष्णा भी देखीं सबने ,
फिर भी पूछा बाम कहां,
मूढ़ों के जंगल में जाकर,
ढूढा फिर भी अज्ञ कहां,
बंजारे से सबने पूछा,
नाम है क्या और धाम कहां,
खडगहस्त भी देखा सबने,
फिर भी पूछा शौर्य कहां,
काष्ठ पिंजर के टुकड़े भी,
सम्बोधित हो भुजंग जहां
उसी क्षितीश से पूछा जगने,
श्यामा की तृष्णा हैं कैसी
बंजारे से सबने पूछा,
नाम है क्या और धाम कहां।
नाग मणी
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