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शीर्षक -ईश्वर और कर्म

                
                                                         
                            ईश्वर और हम और कर्म है।
                                                                 
                            
जन्म मिला हमें अवसर है।
सच और सही राह चलते हैं।
हर कर्म फल ईश्वर और हम हैं।
नीरज सच वो राह लिखते हैं ।
सच और सही हमारे कर्म हैं।
आज हमारे मन भाव रहते हैं।
शारीरिक मानसिक कर्म होते हैं।
समय और हालात कुदरत होती हैं।
बस सब हम समझते कर्म करते हैं।
जीवन और जिंदगी में सच होते हैं।
हम सब इंसान ईश्वर और कर्म है।
सोच हमारी बस अपनी होती हैं।
जन्म मरण सब कुछ निश्चित हैं।
एक-दूसरे को सहयोग करते हैं।
आओ ईश्वर और कर्म सोचते हैं।

- नीरज कुमार अग्रवाल चंदौसी उत्तर प्रदेश
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एक घंटा पहले

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