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शीर्षक - हमारे मन

                
                                                         
                            हमारे मन हमारी सोच है।
                                                                 
                            
छल फरेब स्वार्थ होते हैं।
जन्म हमें जो मिलता हैं।
हमारे मन के साथ होता हैं।

नीरज हमारे मन लिखते हैं।
आधुनिक समय बताते हैं।
सच और सही न कहना हैं।
जब तक हमें जीवित रहना है।

आज राजनीति घर परिवार है।
एक-दूसरे से ईर्ष्या रखते हैं।
अपने कहां पराएं बने सब है।
धन संपत्ति के साथ झगड़े हैं।

एक दिन सब यही रह जाता है।
हमारे मन और हम सब देखते हैं।
मिल जुलकर हमारे मन रहने हैं।
आज सही पता कल मिलते हैं।

कविता लेख कहानी सच बताती है।
हर एक कर्म का फल हम पाते हैं।

- नीरज कुमार अग्रवाल चंदौसी उत्तर प्रदेश
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 hours ago

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