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राजस्थानी मीरा

                
                                                                                 
                            कृष्णा, काश!
                                                                                                

मुझे मीरा का हृदय दिया होता!
डूबकर मेरा मन ही नहीं
तन से भक्ति और प्रेम
का स्वाद चखा होता!
हाय ! मीरा तू कितनी महान,!
स्वयं कृष्ण ने तुम्हें पति होने का दिया
वरदान ।
बचपन, बीता, जवानी बीती
, मोह, माया, और परिवार के
आकर्षण को त्याग कर,
कृष्ण के नाम का सिंदूर लगाकर,
अमर सुहाग का किया वरण
मीरा कैसी प्रेम दीवानी थी, ?
पवित्रता और प्रेम पर बलिदानी थी।,
अमिट उस राजपुतानी
की अमृतवाणी थी,।
राग, भैरवी
और भगवान के भजन पर मर मिटनेवाली, वो क्षत्राणी थी।
हुए, मीरा पर न जाने कितने असह्य, जुल्म,
पीड़ा को हरदम किया, वरण
 प्रेम और विश्वास ने
मीरा को हर दारूण, विषाद, से अवसाद,
से किया मुक्त।
स्वयं कृष्ण ने किया, मीरा के कष्टों का निवारण
दर्शन देकर मीरा का स्वीकार किया अभिवादन
अभिव्यक्ति की पराकाष्ठा,
भजन और भक्ति की पराकाष्ठा
ने मीरा को कर दिया महान
संत
रविदास और तुलसीदास ने किया उसका वर्णन
मीरा के भक्ति पथ का मार्ग प्रशस्त किया
मीरा क्षत्राणी से साध्वी हुई,
पर मिट्टी के कर्ज से कभी मुक्त न हुई, ।
देशभक्ति और प्रेम ने मीरा को हरदम
विकल किया,।
प्राणपण से, मीरा ने
कुंवर, राणा प्रताप के रक्त में
शौर्य और साहस का !
मातृभूमि के प्रति कर्तव्य पथ पर
आरूढ़ होकर क्षत्रिय धर्म का आवेग भरा
उसमें नवप्राणों का संचार किया,
जब जब कुंवर प्रताप पर संकट आया,
मीरा के भक्ति और ज्ञान
राणा के लिए कवच और ढाल बनकर
शत्रु दल का कर मर्दन कर
मेवाड़ के लिए अभेद्य दुर्ग बना।
मीरा का बहुल्य सहचर्य,
राणा के महाराणा तक के सफर को
शौर्य और साहस से सिंचित 'किया, ।
बिना किसी मोह माया में पड़कर ।
मीरा ने देशभक्ति के लिए भक्ति मार्ग को प्रशस्त किया
सनातन संस्कृति और शिक्षा पर अपने
राग और संगीत से भरपूर ज्ञान दिया,
प्रेम समर्पण है विश्वास है इसका करो अभिनंदन ।
हे कृष्ण मुझे मीरा का हृदय दिया होता
डूबकर मेरा मन तन से भक्ति और प्रेम का
स्वाद चखा होता,
अमर सुहाग की चुनर ओढ़
मीरां के सौभाग्य और
ज्ञान की प्रदीप्त ज्योति में
आकंठ डूबकर भक्ति का रसपान किया होता!
काश! हे कृष्ण मुझे मीरा जैसी भक्ति दिया होता!.
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2 months ago

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