गंगाजल जैसा है निर्मल
वह पावन धरा है भारत की
जहां मस्तक पर कश्मीर मुकुट
सिरमौर हिमालय साथ खड़ा
जहां कलकल बहती है नदियां
जहां खग करते क्रीडा क्रंदन
जहां मानुष का है मन निश्छल
वह पावन धरा है भारत की
जहां लाल किला प्राचीर खड़ा
जहां ताज खड़ा बनकर गौरव
जहां माटी सोना उगले है
वह पावन धरा है भारत की
जहां मोक्ष दायिनी है गंगा
जहां घाट बनारस है अस्सी
दरगाह जहां है चिश्ती की
वह पावन धरा है भारत की
जहां देवता का वास है
परियों का निवास है
जहां दोस्ती बहुमूल्य है
वह पावन धरा है भारत की
जहां मन में राम बसे अल्लाह
जहां होता हो सबका भला
जहां मंदिर मस्जिद साथ खड़े
वह पावन धरा है भारत की
जहां वीर अहिंसा प्रेमी है
योग जहां की धरोहर है
उस देश के हम सब वासी हैं
वह पावन धरा है भारत की
MOHD TASVIRUL ISLAM
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