मैं लिखने की कोशिश में हूं एक ग़ज़ल
मजमून मुझको बता दे कोई
उनकी नजरें समझने की कोशिश में हूं
बात उनसे भी थोड़ी करा दे कोई
इश्क की चासनी में है डूबी नज़र
एक मुलाकात उनसे करा दे कोई
रूबरू आने से दिल मचलने लगा
रब मुझे भी मोहब्बत सिखा दे कोई
जिसमें मासूमियत बचपना बेहिसाब
रब मुझे भी इबादत सिखा दे कोई
उनकी मदमस्त आंखे हैं शातिर बड़ी
मुझको उनका मुकद्दर बना दे कोई
मेरे दिल में बसा है जो अल्हड़ पना
मुझको अब जिंदगी में सजा ले कोई
मैं उसे भूल जाऊंगा मुमकिन नहीं
मुझको आदत में अपने मिला ले कोई
तेरी तस्वीर सीने में कर लूं दफन
चाह कर भी मिटा अब सके ना कोई
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