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अंजाम

                
                                                         
                            ना प्रेम बुरा है
                                                                 
                            
ना संसार बुरा है
इंसान का इंसान से
गलत व्यवहार बुरा है
धरती अपनी परिधि पर
गति से घूमा करती है
जो मन से हो जाए निर्बल
धरती पर उसका भार बुरा है
मिल जुल कर तुम सब से पूछो
उसका कुशल क्षेम
मलिन ह्रदय का धरती पर
जीवन विस्तार बुरा है
इस संसार की रचना में
बस ईश्वर की ही चलती है
जितना जल्दी समझ ले मानुष
वरना अंजाम बुरा है
जीवन कि तुम कद्र करो
प्यार से इसे बसर करो

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले

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