आंगन में किलकारी गूंजी चेहरे पर मुस्कान सजी
घर मे खुशियाँ लाने को उम्मीदों की रात जगी
बादल मस्त घटाओं के संग आने को भी आतुर है
खुशियों की संकरी गलियां जल्दी से बिन्दास खुलीं
माँ ने कितना दर्द सहा तुझको दुनिया मे लाने को
अपने गोदी के आँचल मे रख के दूध पिलाने को
नन्हे नन्हे आँखो को सुन्दर दुनिया दिख लाने को
आसमान मे तारों की सुन्दर सी बारात सजी
एक तेरे आने भर से खुशिय़ां आँसू बन उमड़े
दादी माँ की आँखों से खुशियाँ झरना बन निकले
घर मे नन्हे कदमों की आहट की आवाज सजी
पापा के कान्धे पर आज ज़िम्मेदारी खूब चढ़ी
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