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इज्जत रहे

                
                                                         
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सोच-समझ कर बोलिए, हरदम हर
एक बात ।
वरना अपनी शामत आए , पता चले
औकात ।।

महिलाएंँ सशक्त हैं, चाहें पहने चूड़ी या बुरका।
माफी भी आसान नहीं, हर झटके पर झटका ।।

बिना वारंट जेल तपाक, बोले कोई
तीन तलाक।
नापाक नहीं बहू-बेटियांँ, जीवन
नहीं कोई मजाक।।

किसकी कैसी कब कटी, आंँहों और
कराहों में ।
दबी-कुचली अब रही नहीं, अस्मिता
दमकी हजारों में।।

जैसी अपनी बहू बेटियांँ, होतीं औरों की भी ।
आबरू सबकी एक समान,समझो यह बात अभी ।।

नारी का सम्मान करो, नहीं
मात्र गाहे-बगाहे।
घर-बाहर, संसद-सड़क, हर जगह
इज्जत रहे।।
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5 महीने पहले

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