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मनोहारी अरुण

                
                                                         
                            मनोहारी अरुण निकला ,
                                                                 
                            
नया ये साल आया है।
लगे ये भोर पावन भी,
नया विश्वास पाया है।।
करें स्वागत प्रथम तेरा,
करें सत्कार जी भरकर,
नयी सौगात लाया है।।
खुशी के गीत गाता मन
चमकती आज काया है।

करें शुभदा कृपा हम पे ,
चले ये लेखनी हरदम।
बढ़ायें ज्ञान हम अपना ,
मधुर हो गान भी सरगम।।
खिलाये फूल काँटो में,
धरा ओढ़े चुनर धानी।
करें वंदन बहारों का ,
रहें हम दूर नादानी।।
सजाता स्वप्न लाखों अब ,
सभी को खूब भाया है।
नया ये साल प्यारा है ,
नया विश्वास पाया है।।

मिटाके भेद भावो को,
बहाएँ प्रेम गंगा भी ।
लहर कर मीत लहराए,
गगन में ये तिरंगा भी।।
करें हम शांति की पूजा,
यही संदेश देना है।
मिटाना है तिमिर जग का ,
सुखद परिवेश देना है।।
लुटा दें प्राण भारत पर,
यही नवगान गाया है।
नया ये साल प्यारा है ,
नया विश्वास पाया है।।

करें उत्थान भारत का,
बढ़ाये शान भी न्यारी।
सफल अपना करें जीवन ,
बढ़ायें मान भी नारी।।
करें कल्याण मानव का ,
यही अब धर्म है अपना।
पढ़े सद्भाव की भाषा ,
करें नित कर्म है अपना।।
जलाता ज्योति शिक्षा की,
अमिय हमको पिलाया है।
नया ये साल प्यारा है,
नया विश्वास पाया है।।
-मीना भट्ट 
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2 वर्ष पहले

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