मिट्टी मिलती जनाब मिट्टी में
दफ़्न सारे नवाब मिट्टी में
जब भी डाला है आब मिट्टी में
खिलता देखा गुलाब मिट्टी में
ज़िंदा हैं ख़्वाहिशें अभी सारी
रोज़ उठते हुबाब मिट्टी में
रूह रुख़सत हुई है अब देखो
जिस्म होता तुराब मिट्टी में
मिल गयी आज देख लो तुम भी
ज़ीस्त की यह किताब मिट्टी में
ख़त्म सारा विसाल का किस्सा
रोते हम बेहिसाब मिट्टी में
रोज़ चूमें वतन की मिट्टी को
प्यार है लाजवाब मिट्टी में
नाज़ मुमताज़ को भी था जिसपे
मिल गया वो शबाब मिट्टी में
नम हुई आँखे देख मीना की
जब मिला कोई ख़्वाब मिट्टी में
-मीना भट्ट
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X