तुमको बदल कर भला हम भी क्या पायेंगे
जो बदल कर जी भी लिया रिश्ता ये
तो भी कई मायने बदल जायेंगे
अच्छा ही बिना बदले देखें थोड़ी जगह बनाकर
शायद हालात ख़ुद ब ख़ुद संभल जायेंगे
क्या करेंगे हर तस्वीर में हँसीढूँढकर
हम साथ हैं तस्वीर में चलो इसी से बहल जायेंगे
चूल्हा गर्म रखना रसोई का
समान कम सही आँच में बेरुख़ी सही
थोड़ी मोहब्बत तुम ले आना थोड़ी हम ले आयेंगे
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X