प्रेमिका बोली— जानू तुम तो मेरे हो,
पत्नी बोली—“पहले बताओ,किसके हो?”
यह सुन कवि बेचारा दोनों तरफ मुस्काया,
मन ही मन बोला—आज फिर से फँसाया!
प्रेमिका कहती—“मेरी कसम, सच बोलो,
पत्नी से ज्यादा मुझे दिल में तोलो।”
पत्नी बोली—“इतने चुप क्यों हो आज?
किसके मैसेज ने बिगाड़ा है मिज़ाज?”
प्रेमिका के लिए लिखी मैंने ग़ज़ल,
पत्नी ने पढ़ ली—मचा दिया ग़ज़ब!
बोली—“वाह! क्या खूब निभाई यारी,
मेरे लिए तो लिखते हो बस सब्जी-तरकारी!”
प्रेमिका बोली—“मुझको चाँद कहो,
पत्नी बोली—“पहले ये बर्तन धो!”
कवि ने दोनों को खुश करने की ठानी,
एक को सुनाई ग़ज़ल, दूजी को कहानी।
प्रेमिका में इश्क़ की मीठी है रवानी,
पत्नी में घर की पूरी है निगहबानी,
एक कहे—“ तुम मेरे दिल की जान,”
दूजी बोले—“पहले भर दो गैस का सामान!”
कवि बेचारा प्रेम का मारा हुआ,
दो नावों में पैर पसारा हुआ,
एक तरफ मोहब्बत, दूजी गृहस्थी,
बीच में उसकी कविता गई पिसती!
अब कवि ने सीखा जीवन का सार—
प्रेमिका है मेरी कविता, पत्नी संसार
प्रेमिका से मिलती है शायरी की उड़ान,
पत्नी से मिलता है जीने का सामान!
इसीलिए कवि एमके सिंह हाथ जोड़कर
कहता है—“दोनों से मेरा जीवन आबाद रहे,
प्रेमिका मेरी ग़ज़ल, पत्नी मेरी किताब रहे!”
लेकिन इतना कहकर चुप हो जाता है बेचारा
कहीं दोनों ने सुन लिया तो गया कवि मारा।।
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