आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

अगर इन शब्दों से तुम्हारी

                
                                                         
                            मेरी कलम से निकली
                                                                 
                            
शब्दों से, अगर कोई
गुनगुनाती स्वर तुम्हें
सुनाई देने लगे, तो,
समझ लेना कि, गुन गुनकर
कुछ भी नहीं लिखा है,
दिल से कसमसाती हुई
निकलती प्रीत तरंगों ने
मेरी उंगलियों को इतना
प्रेरित कर दिया कि, ये
पता ही नहीं चला कि, कब
कोरे कागज पर क्या लिख गया!!

अगर लिखा हो कि, तुम्हारी
आंखों ने शरारत कर हमें
तंग कर दिया, तो,फिर, तुम,
ये मान ही लेना कि, ऐसा
हुआ ही है,इसमें मेरी कलम
से निकली शब्दों का कोई
चमत्कार नहीं है, नहीं है, नहीं है!!

अगर इन शब्दों से तुम्हारी
सांसों में खुशबू आने लगे, तो
समझ लेना कि, तुम्हारे मन
के झील में, कोई पुष्प खिला है,
जिसका कोई नाम नहीं है,
और, अगर नाम है भी तो
शायद तुम्हें और हमें
ये मालूम ही ना हो!!

इन शब्दों को पढ़ना नहीं,
सिर्फ महसूस कर लेना
और कुछ भी ऐसी हरकतें
नहीं करना कि, लोगों की
नजरें तुम पर टिकने लगे!!

 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
46 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर