हमने कोशिश तो की,
'अनाम' बयाँ कर न सके।
दिल हसरतों से लबरेज़
पर ज़ुबाँ पर ला न सके।
मेरी शिफ़त कुछ ऐसी
कोई ख्वाहिश कर न सके।
जिसके लिए प्यार उमड़ा
उसे सुने कुछ कह न सके।
प्यार अपने दिल का हम
दिल से बाहर रख न सके।
होना तय था फ़ना मुझे
नूर से नजरें मिला न सके।
तमाम ख़्याल दिल में थे
अपना इश्क़ आजमा न सके।
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