जो देश पर कभी मर मिटें थे,
कैसे थे वो वीर,
कैसे थे वो धीर।
न जाने वो किस मिट्टी के बनें थे,
जिनके सीने मौत की घड़ी में भी बेखौफ़ हो
दुश्मनों के सम्मुख शौक से तने थे।
हंसते-हंसते तन-मन पर सह गयें कितने ही जख्म,
सोच के ये कि
किसी दिन देश के काम आयेंगा
उनका उठाया हर एक कदम!
भारत माँ के उन लालों को करती हूँ मैं
कोटि-कोटि प्रणाम और नमन
जो दे गयें हमें आजाद वतन।
- मंजू "मंजुला"
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