कभी था मैं श्रंगार तेरा
हरा भरा मुझसे संसार तेरा
फल फूल बाद में थे तरू
मैं सबसे पुराना साथी तेरा
आज जब मैं मुरझा गया हूँ
बेरंग सूखा पत्ता हो गया हूँ
कैसे मुझको त्याग सके तुम
कैसे इतने निष्ठुर हुए तरू तुम।
-मं शर्मा
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