जब जिंदगी ख़फ़ा हुई
हासिल ना हमें हवा हुई
रह गए घुट के चार दीवारों मेँ
इतनी बुरी हमें सजा हुई,
ना समझ सके जिंदगी का सबक
अब तो मौत सें ही जैसे वफ़ा हुई।
- मंजू आस्था
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