अकेला है तो ग़म न कर,
ख़ुशनसीब है तू,
चल रहा है भीड़ से अलग हटकर,
खोया नहीं है अपना अस्तित्व तूने।
इस भीड़ से तुझे क्या लेना-देना,
कुछ दूर तक चलती साथ तेरे,
फिर तुझे तन्हा कर देती।
अब कोई मलाल नहीं,
तू किसी भीड़ का हिस्सा नहीं।
तू खुद में उतर, खुद को तलाश कर,
तेरी मंज़िल भी तू, तेरी राह भी तू।
ख़ुशनसीब है तू,
अकेला है तो ग़म न कर।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X