आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मेरा तन-मन

Mera Tan Man
                
                                                         
                            तेरे प्रेम में डूब कर हुआ है अचेतन
                                                                 
                            
मेरा तन-मन
उड़ रहा है तुझ संग
भौरा बन…हर उपवन
कभी छूने हृदय तल के दबे एहसासों को
निकल पड़ता है…मत्स्य बन
पावस से प्रेम की तृष्णा लिए
धरा से तृषित...ओष्ठ बन
नींद के आकाश में इठलाता है
गोते लगाता हुआ..स्वप्नों का पंछी बन
अनुभूतियों की कश्ती लेकर
निकल पड़ता है..करता है कितने जतन
तुझसे मिलन को तेरे शहर
मेरा ये चंचल मन

हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर