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नारी तुम खुद में खुश रहो: कविता

                
                                                         
                            नारी तुम चमत्कार हो इस बात पर खुश रहो
                                                                 
                            
नारी तुम सृष्टि के आधार हो इसे महसूस करो
जो तुम्हें नहीं समझता उसे नजर अंदाज करो
नारी तुम न्यारी हो इस बात पर खुश रहो
कभी मायूस ना हो हर हाल में खुश रहो
तुम खुद में संपूर्ण हो इस एहसास से खुश रहो
जीती हो तुम दूसरों के लिए इस अंदाज में खुश रहो
तुम दूसरों के चेहरे के मुस्कान हो इस मुस्कान पर खुश रहो
हर पल कर्मो में संलग्न रहती हो इस वीरता पर खुश रहो
दूसरों के लिए जीना ही तुम्हारा मकसद है इस नेक काम पर खुश रहो
तुम दुनिया की सोच से ऊपर हो अपनी महानता पर खुश रहो
तुम गिर कर भी खड़ी हो जाती हो अपनी जज्बा पर खुश रहो
बिना गलती के भी झुक जाती हो अपनी शराफ़त पर
खुश रहो
किसी से उम्मीद मत लगाओ खुद में खुश रहो।
-ममता तिवारी
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6 महीने पहले

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