मन करे लिखती रहूं, कविता मै हाथों से
दिल में करार नहीं नींद गई आंखों से,
जागते रहती हूं अक्सर में रातों में,
कट जाता है दिन तुम्हारे ही बातों में।
पता नहीं क्यों? इतनी बेकरारी है तेरी यादों में,
कलम चलने लगता है दिन हो चाहे आधी रातों में,
कुछ तो बात है तेरी शोख अदाओं में,
हौसला दे जाती है मुश्किल भरी राहों में।
थाम लेती हो हाथ गिरने ना देती हो,
बिन बोले साथ इतना कैसे निभाती हो,
आशा और उम्मीद की चादर ओढ़ाती हो,
हर्ष और उल्लास के फूल मन में खिलाती हो।
जिंदगी के हर मोड़ पर सही राह दिखाती हो,
सबसे अच्छी दोस्त, सहेली और साथी हो,
हर वक्त खुशियों से नवाजती हो,
इतनी नजाकत कहां से जानती हो।
सच में, तुम ऊर्जा के स्रोत,
ज्ञान की भंडार और,
महासागर हो।
शिक्षा से ओत प्रोत,
अथाह ज्ञान के,
गागर हो,
मेरी प्रेरणा हो।।
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