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"मां की महिमा" मैं सबल हो जाती हूं

                
                                                         
                            मां आपकी कृपा से, मैं सबल हो जाती हूं
                                                                 
                            
आपकी ही कृपा से, शक्ति, बल पाती हूं
महिमा आपकी मैं हर वक्त गाती हूं
मां आपके चरणों में मैं शीश नवाती हूं
लाल,चुनरी,पीली साड़ी में आप सज धज कर आती हैं
मांग टीका,हार,नथिया, कंगन सोलह सिंगार में खूब भाती हैं
पायल, बिछिया, पाजेब पहन रुनझुन करते आती हैं
आपकी अद्भुत चमचम चेहरा मन को खूब लुभाती है
बल, बुद्धि, विवेक देकर आप निहाल कर देती हैं
आपकी शक्ति से मां ये सृष्टि चलती है
गिरकर भी, मैं आपकी कृपा से खड़ी हो जाती हूं
आप होती हैं साथ तो मैं निडर हो जाती हूं
हर उलझनों से मैं यूं ही मुस्कुराकर निकल जाती हूं
हर तरफ मां मैं एक, चमत्कार पाती हूं
आपकी कृपा दृष्टि से मैं धन्य धन्य हो जाती हूं
दिल की हर धड़कन में, मैं आपको बसाती हूं
मां आपकी मुस्कान से मैं खिल खिल जाती हूं
मां आपकी महिमा निराली मैं खूब जानती हूं
मां आपकी महिमा से मैं निर्भीक हो जाती हूं
मां आपकी कृपा से सबल,साहसी हो जाता हूं
हर संकटों से तुरंत मैं, निजात पाती हूं
मां आपके सभी रूपों को नमन, वंदन करती हूं
मां आपको बार बार प्रणाम,अभिनन्दन करती हूं।।
-ममता तिवारी
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5 महीने पहले

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