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दिवाकर सा जग में उजाला करूँ

                
                                                         
                            चाहती हूँ
                                                                 
                            
फूलों सी खुशबू बिखेरूँ
दिवाकर सा जग में उजाला करूँ
रखूँ धीरज इस धरती के जैसा
दुनिया के लिए नेक काम करूँ

शालीनता को साथी बनाऊं
कभी न मैं मगरुर बनूं
बैर भावना से दूर रहूँ
सबके चेहरे पर
रौनक बिखेरूँ
खुद से ज्यादा
दूसरों का ख्याल रखूँ।।
-ममता तिवारी
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एक घंटा पहले

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