इस भीड़ भरी दुनिया में,
किसको किसकी पड़ी है,
दो लफ़्ज़ कोई सहानुभूति के बोल ना सके,
वह काम भी ये चुपके से करती है,
कविता बोलती है।
गूंगे समाज में हम रहते,
दो अच्छे हिम्मत वाले शब्दों के लिए तरसते,
यह पूरे ज्ञान के महासागर हम पर उड़ेलती है,
कविता बोलती है।
सही मार्गदर्शन देकर,
हौसलों से हमें खड़ी करती है।
जीवन की चुनौतियों में,
सही मार्ग दिखाती और अच्छी पथप्रदर्शक बनती है।
कविता बोलती है।
ये हमें साहस लगन संकल्प के साथ,
चुनौतियों का, सामना करने की हिम्मत देती है।
जिससे हमें निराशा के स्थान पर,
आशा, हौसला से आगे बढ़ने की शक्ति मिलती है।
कविता बोलती है।
सही रास्तों की पहचान कराती है,
सौर्य ऊर्जा बढाती है,
कविता बोलती है।
-ममता तिवारी
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