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मेरा यह शत-शत प्रणाम।।

                
                                                         
                            हे कान्हा!
                                                                 
                            
आप प्रेम हैं प्रकाश हैं
सृष्टि की संपूर्ण आस हैं
कण-कण में हैं जन-जन में हैं
सर्वत्र आप व्याप्त हैं

देवकी मां की आंखों का तारा
यशोदा मां का लाडला
माखन की मटकी फोड़ने वाले
जगत के आप उजाले हैं

सिर पर घुंघराले बाल
जिस पर सजता मोर मुकुट है
कर में सुंदर मुरली मधुर है
जो प्रेम का राग बरसाती है

सांवला-सलोना रूप
मन को हर लेता है
मुरली की मधुर धुन
सबको लुभाती है

मधुर मुरली की धुन सुन
राधा जी खुद को न रोक पातीं है
दौड़ी-दौड़ी अपने कान्हा से
मिलने आ जाती हैं

राधा जी के प्रेम का बस सार आप हैं
मीरा जी के भजनों में गूंजती झंकार
द्रौपदी जी की लाज बचाने वाले
आप हैं जगत में सबसे महान

हे कान्हा!
आप प्रेम भी हैं
आप संहारक भी हैं
इस डूबती नैया का
आप खेवनहार हैं

आपके चरणों में आकर
मिट जाता हर अंधेरा
आपकी भक्ति में ही छुपा है
जीवन का सबेरा

सबके मन मंदिर में बसे हैं
आप हे गिरधर गोपाल
आप ही हैं आदि-अंत
आप ही जग के पालनहार

भोले-भाले नटखट कान्हा जी
करते सब पर कृपा अपार
जो भी शरण में आता
कर देते उसका बेड़ा पार

रणभूमि में सारथी बनकर
अर्जुन जी का संशय दूर किए
गीता का पावन ज्ञान सुनाकर
जग को नया प्रकाश दिए

हे गोविंद! हे गोपाला!
आप ही हैं जीवन के आधार
चरणों में आपके अर्पित है
मेरा यह शत-शत प्रणाम।।
-ममता तिवारी
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3 घंटे पहले

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