मुझ को मेरे नज़दीक ले आई,
है चीज़ बड़े काम कि तन्हाई।
हम हाॅ॑ में हाॅ॑ मिलाते रहें जबकि,
वो बात सुना रहा था सुनी सुनाई।
एक अपने सिवा नहीं कोई किसी का,
बुरे वक्त ने बात ये हमें समझाईं।
भला मैं कैसे समझती इरादे उसके,
जब जान सकी न उसको खुदाई।
बरसों दो जाने-पहचाने अजनबी,
साथ रहकर भी सहते रहे जुदाई।
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