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ख्वाईश

                
                                                         
                            ताउम्र ये ख्वाइश रही,
                                                                 
                            
एक दोस्त होना चाहिए।
हर गम हो या खुशी
कह दूं मैं उसको बिल्कुल सही
ना मेरा कोई राज रहे
ना उसका कोई राज रहे।
दबे न कोई खुशी या गम
दिल के राज खुले हरदम
जिन्दगी के घोर अंधेरे में,
दिखाई दी जो एक किरण।
आशा की लहरों ने मेरे
समुंद्र मन पर किया मंथन।
बढ़ी जो उसकी ओर मैं,
लिए हज़ारों स्वप्न मैं।
सोचा जो थोड़ा रुककर
ठहर गए मेरे कदम
एक ही डर ने रोक लिए,
बढ़ते हुए मेरे कदम।
न जाने क्या नाम दे ये दुनिया,
कर ना दे बदनाम ये दुनिया।
दबा लिया मैंने उस ख्वाईश को,
उठते हुए दर्द के तूफान को।
ना दोस्त हैं ना हमराज है।
यादें हैं तन्हाइयां है।
अकेले में उन्ही का साथ है।
लेकिन मिला ना जब कोई सलीका
सोच लिया मैंने एक तरीका ।
कोई मेरा दोस्त ना बन सका,
दर्दे गम का साज ना बन सका।
क्यों ना बाटूं किसीका दर्द,
ले लूँ उसके सारे गम।
लिए कई राज मैंने,
सीने में हूँ उन्हें दबाये।
अब अपना गम थोड़ा कम है,
दुनिया में जो इतना गम है,
कोशिश है वो कम कर सकूं,
उनका गम मैं बाँट सकूँ।
ना तन्हा रहे वो मेरी तरह,
वो गम ना सहे मेरी तरह।
मेरा तो कोई ना बन सका,
मैं उन सबकी बन सकूँ,
इतनी शक्ति देना भगवान ,
ये नेक काम मैं कर सकूँ।।
ममता खुराना
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2 वर्ष पहले

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