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ख्वाब

                
                                                         
                            आंखों में अरमान लिए
                                                                 
                            
जहन में ख्वाब लिए
चल पड़ी हूं उस पथ पर
जहां अनेको मोड़ हैं।
मंजिल तो बहुत दूर हैं
ख्वाइश है उस तक पहुंचु
रास्ते बहुत कठीन है
पार कैसे करू।
हर बढ़ते कदम के पीछे
कोई तो वजह हैं,
हर मुस्कुराहट के पीछे
कोई तो वजह हैं
कोई तो हैं, जो मेरा साथ देगा
यहीं ख्वाइश हैं
ख़ुद में ही कैद हूं
कोई क्या जाल बिछाएगा!
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2 वर्ष पहले

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