कुआं तो एक है
पानी भरा अनेक
मटके में भेद क्यों?
मिट्टी सबकी एक
उसमें पानी भी तो एक है।
अरे !इंसान का रंग रूप एक है
लहू सब में एक, वाणी सबकी एक
फिर जाती में भेद क्यो?
आग सबकी एक है
रोटी में भेद क्यों?
मौत तेरी भी आएगी
मेरी भी एक दिन
कफ़न वहीं ,शमशान भी वही
फिर जीते जी क्यों मरते हो।
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