तुम किशोरी हो, प्राणप्रिया हो कान्हा की,
ब्रज की रानी, बरसाने की राजकुमारी।
वृंदावन की महारानी, गोलोकस्वामिनी,
कीर्तिदा-नंदिनी, वृषभानु की राजदुलारी।
तुम अर्धांगिनी हो घनश्याम की...
चरणों में तेरे झुकती है दुनिया सारी,
करुणा की मूरत, तुम हो मंगलकारी।
तेरी कृपा बिना मिले न गिरधर नागर,
तुम भक्ति का उद्गम, तुम प्रेम का सागर।
हे राधेश्यामा! अरज सुनो इस दास की...
तुम अर्धांगिनी हो घनश्याम की।
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